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नक्सलवाद ()
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विश्व को सदियों से सत्य, अहिंसा, और प्रेम का संदेश देने वाला महावीर, बुद्ध और गांधी का देश भारत पिछले चार दशकों से नक्सलवाद का दंश झेल रहा है। घोर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने वाली इस राष्ट्र विरोधी व्यवस्था ने आज देश के बीस राज्यों के दो सौ तेईस जिलों को अपने प्रभाव में ले लिया है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु नक्सली आतंक से सर्वाधिक प्रभावित राज्य हैं। वैसे तो भारत में नक्सलवाद स्वाधीनता संग्राम से पहले ही साम्यवादी या अन्य क्रांतिकारी विचारधारा के रूप में अपनी जड़ें जमा चुका था, किंतु इसे यह नाम पश्चिम बंगाल के नक्सलवाड़ी नामक स्थान से मिला। मार्च, 1967 में इस गाँव के एक आदिवासी किसान बियल किसन के खेत पर स्थानीय भू-स्वामियों ने अधिकार कर लिया। इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप उस क्षेत्र के आदिवासियों ने भू-स्वामियों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह को साम्यवादी क्रांतिकारियों का भारी समर्थन मिला। धीरे-धीरे इस तरह के विद्रोह भारत में अन्य जगहों पर भी होने लगे और उन्हें नक्सलवाड़ी में हुए ऐसे प्रथम विद्रोह के नाम पर नक्सलवादी विद्रोह का नाम दिया गया। इस प्रकार विद्रोह के एक नए रूप नक्सलवाद का प्रादुर्भाव हुआ। नक्सलवाद मार्क्सवादी एवं माओवादी सिद्धांतों से प्रभावित है। मार्क्सवाद जहाँ साम्यवादी विचारधारा को बढ़ावा देता है, वहीं माओवाद अपने हक के लिए सशस्त्र क्रांति पर जोर देता है। माओ चीन के सशस्त्र क्रांति के प्रसिद्ध नेता थे, जिनका मानना था कि राजनीतिक सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। इस तरह नक्सलवाद भू-स्वामियों के विरुद्ध आदिवासियों का एक ऐसा सशस्त्र विद्रोह है, जो अपनी मार्क्सवादी विचारधारा को लागू करने के लिए माओवादी तरीकों को अपनाने पर जोर देता है। अब नक्सलवाद आतंकवाद का रूप ले चुका है, इसलिए इसका शीघ्र समाधान आवश्यक है। नक्सलवाद की समस्या का सही समाधान यही हो सकता है कि जिन कारणों से इसमें वृद्धि हो रही है, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाए। इसमें आदिवासी इलाकों के विकास से लेकर आदिवासी युवक-युवतियों को रोजगार मुहैया कराने जैसे कदम अत्यधिक कारगर साबित होंगे। कुछ इलाकों में आदिवासी अपने हक के लिए भी लड़ रहे हैं। ऐसे इलाकों की पहचान कर उन्हें उनका अधिकार प्रदान करना उचित होगा। कुल मिलाकर यही निष्कर्ष निकलता है कि नक्सलवाद की समस्या के समाधान के लिए एक व्यापक रणनीति बनाते हुए आदिवासी इलाकों का विकास करना अत्यंत आवश्यक है। इधर कुछ वर्षों से भारत के कुछ प्रांतों में नक्सलवाद की तरह अन्य हिंसक गिरोह भी सक्रिय देखे जा रहे हैं। दिसंबर, 2014 में बोडो उग्रवादियों द्वारा असोम के लगभग 80 निर्दोष आदिवासियों की हत्या करने की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, किंतु अब केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने नक्सलवाद सहित अन्य हिंसक गिरोहों से निपटने के लिए नई नीति तैयार की है, जिसके तहत वामपंथी अतिवाद के विरुद्ध लड़ाई में अल्पकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति पर अधिक बल दिया जाएगा।
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