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प्रजातंत्र ()
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प्रजातंत्र में राष्ट्र की समग्र समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए प्रत्येक नागरिक का हित, वैयक्तिकता और सुख-शांति महत्त्वपूर्ण होती है। यह बात हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्री एपीजे अब्दुल कलाम ने कही है। प्रजातंत्र शब्द ग्रीक भाषा से अवतरित अंग्रेजी शब्द डेमोक्रसी का हिंदी रूपांतर है, जिसका अर्थ होता है प्रजा अर्थात् जनता द्वारा परिचालित शासन व्यवस्था। वैसे तो अब तक प्रजातंत्र की कई परिभाषाएँ दी जा चुकी हैं, किंतु उनमें अब्राहम लिंकन द्वारा दी गई परिभाषा सर्वाधिक मान्य एवं प्रचलित है। उनके अनुसार प्रजातंत्र जनता का, जनता के लिए जनता द्वारा शासन है। प्रजातंत्र को स्वीकारने का कारण बताते हुए लिंकन ने यह भी कहा था क्योंकि मैं गुलाम नहीं होना चाहता इसलिए मुझे शासक भी नहीं होना चाहिए। यही विचार मुझे प्रजातंत्र की ओर अग्रसर करता है। इस तरह प्रजातंत्र में जनता में ही प्रशासन की संपूर्ण शक्ति विद्यमान होती है, उसकी सहमति से ही शासन होता है एवं उसकी प्रगति ही शासन का एकमात्र लक्ष्य होता है, हालाँकि सभ्यता की शुरूआत में शासन व्यवस्था के रूप में राजतंत्र की ही प्रमुखता थी। शक्तिशाली व्यक्ति अपने प्रभाव से राज्य पर अधिकार कर लेता था और अपनी इच्छानुसार शासन करता था। इस शासन व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह थी कि प्रायः इसमें आम जनता को अपनी बात रखने का अधिकार नहीं होता था। कई बार तो उसे शासकों के दमन चक्र का भी शिकार होना पड़ता था। मानव सभ्यता में जैसे-जैसे प्रगति हुई, लोग इस शासन व्यवस्था के विकल्प ढूँढ़ने लगे। अंततः शासन व्यवस्था एक व्यक्ति के हाथ में न रहकर संपूर्ण जनता के हाथ में रहे, ऐसी व्यवस्था की गई। इस व्यवस्था को ही प्रजातंत्र नाम दिया गया। दक्षिण अफ्रीका के क्रान्तिदर्शी जननायक एवं पूर्व राष्ट्रपति श्री नेल्सन मंडेला ने कहा था मैंने प्रजातंत्र और स्वतंत्र समाज के आदर्श को हृदयस्थ किया है, जिसमें समान अवसरों के साथ सभी लोग मेल-मिलाप से रहते हैं। यह एक आदर्श है। मैं इसमें जीना और इसे पाना चाहता हूँ और आवश्यकता पड़ने पर मैं इस आदर्श के लिए जान भी दे सकता हूँ। यद्यपि प्रजातंत्र की आधुनिक स्थिति का विकास होने में हज़ारों साल लग गए, लेकिन आज प्रजातंत्र एक शक्तिशाली प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में उभर चुका है और भारत विश्व के सबसे बड़े प्रजातांत्रिक देश के रूप में जाना जाता है। यदि हम भारतीय इतिहास पर नजर डालें, तो तृतीय शताब्दी में भारत के सोलह जनपदों में वैशाली जनपद भी एक था, जहाँ गणतांत्रिक शासन व्यवस्था विद्यमान थी, किंतु आधुनिक प्रजातंत्र की उत्पत्ति का स्थल यूरोप को माना जाता है। इसकी नींव मध्यकाल की बारहवीं एवं तेरहवीं शताब्दी के बीच विभिन्न यूरोपीय देशों में राजतंत्र के विरोध के साथ पड़ी। यूरोप में पुनर्जागरण एवं धर्म सुधार आन्दोलनों ने प्रजातंत्रात्मक सिद्धांतों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन आन्दोलनों ने व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता पर बल दिया तथा राजा की शक्ति को सीमित करने के प्रयत्न किए।
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