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मीडिया ()
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मीडिया का प्रभाव आधुनिक समाज पर स्पष्ट देखा जा सकता है। चाहे फैशन का प्रचलन हो या आधुनिक गीत-संगीत का प्रचार-प्रसार इन सब में मीडिया की भूमिका अहम् होती है। टेलीविजन एवं फिल्म के कलाकार रातों-रात प्रसिद्ध हो जाते हैं। यद्यपि भारत में अधिकतर फिल्मों का उद्देश्य मनोरंजन के माध्यम से धन कमाना होता है, किंतु पिछले कुछ वर्षों में कुछ सार्थक एवं समाजोपयोगी फिल्मों का भी निर्माण हुआ है, जिन्होंने समाज को दशा एवं दिशा प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लोगों के रहन-सहन, बोल-चाल, रंग-ढंग सबमें टेलीविजन एवं सिनेमा का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलता है। युवा वर्गों के अतिरिक्त बच्चों एवं महिलाओं पर भी इनका प्रभाव पड़ता है, जो उनके रहन-सहन में झलकने लगता है। इस तरह मीडिया आधुनिक समाज को हर प्रकार से प्रभावित कर रहा है। यहाँ तक कि यह संस्कृति को भी प्रभावित करने में पूर्णरूपेण सक्षम होता है। आजकल भारतीय युवा वर्गों में पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव इसी के कारण देखने को मिल रहा है। इधर कुछ वर्षों से धन देकर समाचार प्रकाशित करवाने एवं व्यावसायिक लाभ के अनुसार समाचारों को प्राथमिकता देने की घटनाओं में भी तेजी से वृद्धि हुई है, फलस्वरूप इनकी विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठने शुरू हो गए हैं। इसका कारण यह है कि भारत के अधिकतर समाचार-पत्रों एवं न्यूज चैनलों का स्वामित्व किसी न किसी स्थापित उद्यमी घराने के पास है। जनहित एवं देशहित से अधिक इन्हें अपने उद्यमों के हित की चिंता रहती है, इसलिए ये अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं। सरकार एवं विज्ञापनदाताओं का प्रभाव भी समाचार-पत्रों एवं टेलीविजन प्रसारण में देखा जा सकता है। प्रायः समाचार-पत्र अपने विज्ञापनदाताओं के विरुद्ध कुछ छापने से बचते हैं। इस प्रकार की पत्रकारिता किसी भी देश के लिए घातक है। पत्रकारिता व्यवसाय से कहीं अधिक सेवा है। व्यावसायिक प्रतिबद्धता पत्रकारिता के मूल्यों को नष्ट करती है। मीडिया के माध्यम से लोगों को देश की हर गतिविधियों की जानकारी तो मिलती ही है, साथ ही उनका मनोरंजन भी होता है। किसी भी देश में जनता का मार्गदर्शन करने के लिए निष्पक्ष एवं निर्भीक मीडिया का होना आवश्यक है। मीडिया देश की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की सही तस्वीर प्रस्तुत करता है। चुनाव एवं अन्य परिस्थितियों में सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों से जनसाधारण को अवगत कराने की जिम्मेदारी भी मीडिया को वहन करनी पड़ती है। यह सरकार एवं जनता के बीच एक सेतु का कार्य करता है। जनता की समस्याओं को इस माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जाता है। विभिन्न प्रकार के अपराधों एवं घोटालों का पर्दाफाश कर यह माध्यम देश एवं समाज का भला करता है, इसलिए निष्पक्ष एवं निर्भीक मीडिया के अभाव में स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस तरह यह माध्यम आधुनिक समाज में लोकतंत्र के प्रहरी का रूप ले चुका है और यही कारण है कि इसे लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ की संज्ञा दी गई है।
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