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बलात्कार जैसे जघन्य आपराधिक घटना की बदौलत हिस्से आए ऐसे हालात नाबालिग लड़कियों के भीतर अवसाद, चिंता और आत्महत्या की मनःस्थिति तक बना देते हैं। बहुत सारी पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पढ़ाई छूट जाती है। अपनों के व्यवहार में उनके प्रति सहजता का भाव नहीं रहता। सामाजिक परिवेश में भी उपेक्षा और उलाहने ही मिलते हैं। भविष्य हर मोर्चे पर असुरक्षित प्रतीत होता है। ज्ञात हो कि पिछले साल बंबई हाईकोर्ट ने भी पंद्रह वर्षीया बलात्कार पीड़िता को गर्भ हटाने की अनुमति दी थी। इस मामले में पीड़िता ने कहा था कि वह भावनात्मक, आर्थिक और सामाजिक रूप से बच्चे की देखभाल नहीं कर पाएगी। नेहरू का मानना था कि वैज्ञानिक सोच एक स्वतंत्र व्यक्ति के दृष्टिकोण को दर्शाती है। एक ऐसा समाज जो साक्ष्य और तर्कसंगत जाँच को महत्त्व देता है, वह बौद्धिक स्वतंत्रता को भी महत्त्व देता है। उस स्वतंत्रता के बिना विज्ञान और लोकतंत्र दोनों का दम घुट जाता है। नेहरू ने स्वीकार किया कि विज्ञान हर सवाल का जवाब नहीं दे सकता। कला की सुंदरता, कविता की भावना और प्रेम का रहस्य इसकी पहुँच से परे हैं। उनका तर्क था कि जब हम दर्शन के क्षेत्र में पहुँच जाते हैं और तीव्र भावनाओं से भर जाते हैं, तब भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानसिकता आवश्यक बनी रहती है। नेहरू के लिए स्वतंत्रता के बाद भारत की चुनौती स्पष्ट थी। आधुनिक विज्ञान में निपुण होना और एक वैज्ञानिक दृष्टि का विकास करना, ताकि देश आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रगति कर सके। इसलिए वैज्ञानिक मनोवृत्ति उनके लिए एक सांस्कृतिक आदर्श भी था और विकासात्मक आवश्यकता भी। ये वैदिक ऋषियों द्वारा प्रणीत धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष के जीवन दर्शन में विश्वास रखते हैं और समग्र सफलता को अपना मार्गदर्शक मानते हैं। हर मानव में इस परिपूर्ण सफलता की चाह नैसर्ग में मिली हुई है, क्योंकि मूलतः वह ईश्वर का अंश है और उसकी पूर्णता का उत्तराधिकारी है, लेकिन यह बात दूसरी है कि कुछ ही सौभाग्यशाली इस समग्र सफलता को हस्तगत कर पाते हैं और यह अकारण नहीं है। स्वतंत्र भारत में किसानों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर कई रोजगार योजनाओं व कार्यक्रमों को मूर्त रूप दिया गया, जिनमें ग्रामीण मजदूर रोजगार कार्यक्रम, मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, काम के बदले अनाज कार्यक्रम, स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना आदि प्रमुख हैं। इन विकासोन्मुख योजनाओं व कार्यक्रमों के कारण देश के किसानों की दशा में पहले से बहुत सुधार आया है, परंतु अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में काफी अधिक बेरोजगारी है, जिसका प्रमुख कारण है देश की जनसंख्या का दिनोंदिन अत्यधिक तेज गति से बढ़ना।
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