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किसानों की ऐसी दयनीय स्थिति का एक कारण यह भी है कि भारतीय कृषि मानसून पर निर्भर है और मानसून की अनिश्चितता के कारण प्रायः कृषकों को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। समय पर सिंचाई नहीं होने के कारण भी उन्हें आशानुरूप फसल की प्राप्ति नहीं हो पाती। ऊपर से आवश्यक उपयोगी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण कृषकों की स्थिति और भी दयनीय हो गई है तथा उनके सामने दो वक्त की रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। कृषि में श्रमिकों की आवश्यकता सालभर नहीं होती, इसलिए साल के लगभग तीन-चार महीने कृषकों को खाली बैठना पड़ता है। इस कारण भी कृषकों के गाँवों से शहरों की ओर पलायन में वृद्धि हुई है। आमतौर पर धर्म को संप्रदायों से जोड़ दिया गया है। धर्म, व्यक्ति और व्यष्टि के बीच में तादात्म्य की फलश्रुति है जबकि व्यक्ति और समाज के मध्य का संबंध संप्रदाय के माध्यम से विकसित होता है। संप्रदाय बताता है कि हमारा सामाजिक जीवन किस प्रकार का होना चाहिए और हमें किन विशेष मूल्यों का पालन करना चाहिए। संप्रदाय सामाजिक जीवन के लिए अच्छे एवं बुरे के बीच भेद करके कुछ को स्वीकार और अस्वीकार करता है। इसी स्वीकारने और अस्वीकारने के क्रम में वह विशेष समुदायों का निर्माण और विकास करता है। इसका एक अर्थ यह निकलता है कि धर्म को अगर हम मूल्यों की एक व्यवस्था के रूप में देखते हैं, तो संप्रदाय उन मूल्यों तक पहुँचने का रास्ता हमें उपलब्ध कराता है। प्रधानमंत्री आवास योजना सभी के लिए आवास के लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी। किफायती किराए वाले आवास परिसर, स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना तथा विभिन्न राज्य स्तरीय योजनाएँ भी आवासीय सुविधाओं के विस्तार में योगदान दे रही हैं। हालाँकि, कई चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं। कई बार आवास निर्माण तो हो जाता है, लेकिन रोजगार केंद्रों से दूरी, परिवहन सुविधाओं की कमी और सामाजिक अवसंरचना के अभाव के कारण लोग वहाँ बसना नहीं चाहते। इसलिए आवास नीति को केवल घर निर्माण तक सीमित न रखकर समग्र शहरी विकास से जोड़ना आवश्यक है। आवास वित्त की समस्या भी गंभीर है। यथास्थान उन्नयन, सामुदायिक भागीदारी, भूमि अधिकारों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार अधिक प्रभावी रणनीति सिद्ध हो सकती है। भविष्य की आवास नीति में जलवायु परिवर्तन को केंद्रीय स्थान देना होगा। ऊर्जा कुशल भवन, हरित निर्माण सामग्री, वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा और आपदा प्रतिरोधी निर्माण तकनीकों को बढ़ावा देना समय की माँग है। इससे न केवल पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित होगी, बल्कि दीर्घकाल में आवास की लागत भी कम हो सकती है। आवास का प्रश्न केवल ईंट, सीमेंट और भूमि का प्रश्न नहीं है। एक सुरक्षित और सम्मानजनक घर व्यक्ति को केवल आश्रय ही नहीं देता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के अवसरों तक पहुँच भी सुनिश्चित करता है।
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