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विविघता में एकता ()
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उक्त पंक्तियां भारतवर्ष के संदर्भ में शत-प्रतिशत सही हैं। भारत विविधता में एकता का देश है। यहां हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, पारसी आदि विविध धर्मों को मानने वाले लोग निवास करते हैं। इनकी भाषा, रहन-सहन, रीति-रिवाज, व्यवहार, धर्म तथा आदर्श इन्हें एक-दूसरे से अलग करते हैं। इसके बावजूद भारत के लोगों में एकता देखते ही बनती है। आज भारतवासियों ने आचार्य विनोबा भावे की इस पंक्ति को अपने जीवन में अच्छी तरह चरितार्थ कर लिया है। यदि हम भारतीय समाज एवं जन-जीवन का गहन अध्ययन करें, तो हमें स्वतः ही पता चल जाता है कि इन विविधताओं और विषमताओं के पीछे आधारभूत अखण्ड मौलिक एकता भी भारतीय समाज एवं संस्कृति की अपनी एक विशिष्ट विशेषता है। बाहरी तौर पर तो विषमता एवं अनेकता ही झलकती है, पर इसकी तह में आधारभूत एकता भी एक शाश्वत सत्य की भांति झिलमिलाती है। भारत को भौगोलिक दृष्टिकोण से कई क्षेत्रों में विभक्त किया जा सकता है, परंतु संपूर्ण देश भारतवर्ष के नाम से विख्यात है। इस विशाल देश के अंदर न तो ऐसी पर्वतमालाएं हैं न ही ऐसी सरिताएं या सघन वन, जिन्हें पार न किया जा सके। इसके अतिरिक्त उत्तर में हिमालय की विशाल पर्वतमाला तथा दक्षिण में समुद्र ने सारे भारत में एक विशेष प्रकार की ऋतु पद्धति बना दी है। ग्रीष्म ऋतु में जो भाप बादल बनकर उठती है, वह हिमालय की चोटियों पर बर्फ के रूप में जम जाती है और गर्मियों में पिघलकर नदियों की धाराएं बनकर वापस समुद्र में चली जाती है। सनातन काल से समुद्र और हिमालय में एक-दूसरे पर पानी फेंकने का यह अद्भुत खेल चल रहा है। एक निश्चित क्रम के अनुसार ऋतुएं परिवर्तित होती हैं एवं ऋतु चक्र समूचे देश में एक जैसा है। भारत में सदैव अनेक राज्य विद्यमान रहे हैं, परंतु भारत के सभी महत्त्वाकांक्षी सम्राटों का ध्येय संपूर्ण भारत पर अपना एकछत्र साम्राज्य स्थापित करने का रहा है एवं इसी ध्येय से राजसूय, वाजपेय, अश्वमेघ आदि यज्ञ किये जाते थे तथा सम्राट स्वयं को राजाधिराज व चक्रवर्ती आदि उपाधियों से विभूषित कर इस अनुभूति को व्यक्त करते थे कि वास्तव में भारत का विस्तृत भूखण्ड राजनीतिक तौर पर एक है। राजनितिक एकता और राष्ट्रीय भावना के आधार पर ही राष्ट्रीय आंदोलनों एवं स्वतंत्रता संग्राम में, देश के विभिन्न प्रांतों के निवासियों ने दिल खोलकर सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय एकता की परख चीनी एवं पाकिस्तानी आक्रमणों के दौरान भी खूब हुई। समकालीन राजनीतिक इतिहास में एक युगांतकारी परिवर्तन का प्रतीक बन चुके ग्यारहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम यद्यपि किसी दल विशेष को स्पष्ट जनादेश नहीं दे पाए, फिर भी राजनीतिक एकता की कड़ी टूटी नहीं। भारत में विभिन्न धर्मावलंबियों एवं जातियों के होने पर भी उनकी संस्कृति भारतीय का ही एक अंग बनकर रही है।
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