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युवा शक्ति ()
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शुरू से ही युवाओं के प्रेरणा स्रोत रहे स्वामी विवकानंद का यह कथन राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति के महत्त्व को दर्शाता है और युवाओं ने अपना सर्वस्व न्यौछावर करके यह साबित कर दिया कि उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं। देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत भारतमाता की इन वीर और साहसी संतानों के सामने अंग्रेजों की एक न चली और उन्हें भारत छोड़कर जाना पड़ा। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी भारत को अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान एवं चीन द्वारा किए गए युद्धों का सामना करना पड़ा। देश पर अनावश्यक रूप से थोपे गए इन युद्धों के दौरान हमारी सेना के जवानों ने जिस वीरता और साहस का प्रदर्शन किया, उससे हम भारतीयों का मस्तक गर्व से ऊंचा उठ जाता है। कुछ वर्ष पूर्व हमारी सेना ने कारगिल में घुस आई पाकिस्तानी सेनाओं के भी छक्के छुड़ाए थे। पाकिस्तानी आतंकवादी द्वारा मुंबई में ताज एवं अन्य स्थानों पर किए गए हमलों में भी भारत के जांबाज सेना अधिकारियों और कमांडोज ने पूरी बहादुरी का परिचय दिया। सभी आतंकवादी मार गिराए गए और एक को बंदी बना लिया गया। भारत के युवा वीरों की यह गाथा किसी से छिपी नहीं है। अपने बड़े-बुजुर्गों के मार्गदर्शन में भारत के युवाओं ने देशभक्ति के अतिरिक्त अध्यात्म, धर्म, साहित्य, विज्ञान, कृषि, उद्योग आदि क्षेत्रों में भी पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया है। बिना युवा शक्ति के भारत सोने की चिड़िया न कहलाता और अपनी अनगिनत देनों से विश्व को अभिभूत न कर पाता। अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था कि संपूर्ण मानव जाति को उस भारत को ऋणी होना चाहिए, जिसने विश्व को शून्य दिया है। मैक्समूलर ने भी भारतवर्ष की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए लिखा है यदि मुझसे पूछा जाए कि किस आकाश के नीचे मानव मस्तिष्क ने मुख्यतः अपने गुणों का विकास किया, जीवन की सबसे महत्त्वपूर्ण समस्या पर सबसे अधिक गहराई के साथ सोच-विचार किया और उनमें से कुछ ऐसे रहस्य ढूंढ निकाले, जिनकी ओर संपूर्ण विश्व को ध्यान देना चाहिए, जिन्होंने प्लेटो का अध्ययन किया, तो मैं भारतवर्ष की ओर संकेत करूंगा। भारतवर्ष की इन महान् उपलब्धियों के पीछे देश के युवा वर्ग का बहुत बड़ा योगदान है। आज आईआईटी, आईआईएम जैसे देश के बड़े-बड़े शैक्षणिक संस्थानों या अन्य विश्वविद्यालयों से जुड़े छात्र-छात्राओं के आविष्कारों और शोधों की बदौलत भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर हो रहा है। इतना ही नहीं आज भारतीय छात्र-छात्राएं विदेशों में जाकर भी विश्व के लोगों को अपनी प्रतिभाओं से अचंभित कर रहे हैं। आज भारत के युवा वर्ग ने महात्मा गांधी के इस कथन को अपने जीवन में चरितार्थ कर दिखाया है, अपने प्रयोजन में दृढ़विश्वास रखने वाला एक कृशकाय शरीर भी इतिहास के रुख को बदल सकता है। आज इस सच से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के युवा वर्ग में भारी असंतोष व्याप्त है।
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