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प्रतिभा पलायन ()
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जहां तक प्रतिभा पलायन के कारणों की बात है, तो इसका कोई एक कारण नहीं है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान एवं भारतीय प्रबंधन संस्थान विश्वस्तरीय शिक्षा के माध्यम से अपने छात्रों को श्रेष्ठ तकनीशियन एवं उद्यमी के रूप में विकसित करते हैं। इन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय कंपनियों एवं भारत सरकार की तुलना में बहुत अधिक ऊंचे वेतनमान पर रखने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। प्रतिभा पलायन का एक और कारण यह है कि भारत में पिछले कुछ दशकों में बड़ी तादाद में इंजीनियर, डॉक्टर, कंप्यूटर विशेषज्ञ एवं अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ बने, औद्योगीकरण की मंद प्रक्रिया के कारण इन सभी लोगों को रोजगार प्रदान करना संभव न हो सका, जिसके कारण इनमें से अधिकतर लोगों ने अंततः विदेश का रुख किया। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में शोध की विश्वस्तरीय सुविधा अभी तक भारत में उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिसके कारण शोध करने के इच्छुक अधिकतर लोगों को विकसित देशों का रुख करना पड़ता है। कुछ लोग कहते हैं कि जो लोग यहां से शिक्षा प्राप्त करने के बाद विदेश को अपनी कर्मभूमि बनाते हैं, उनमें देशभक्ति का अभाव होता है। यह बात बिलकुल निराधार है, यदि व्यक्ति को सारी सुविधाएं अपने ही देश में मिलें, तो कोई क्यों पराए देश में पराए लोगों के बीच जीवन व्यतीत करना चाहेगा? किंतु उच्च शिक्षा एवं शोध के इच्छुक लोगों को भ्रष्ट शासनतंत्र के कारण उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है, जिसके कारण लोग विदेश का रुख करने को विवश हो जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि सरकार जिन लोगों की शिक्षा पर इस आशा में करोड़ों रुपये खर्च करती है कि शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे देश के विकास में योगदान देंगे, उनके विदेश जाने से न केवल उनकी शिक्षा पर किया गया खर्च बेकार जाता है, बल्कि उनकी कुशलता का लाभ भी दूसरे देशों को मिलने लगता है। इस तरह प्रतिभा पलायन से देश को बड़ी हानि होती है। हालांकि प्रतिभा पलायन से होने वाली हानियों की अनदेखी नहीं की जा सकती, किंतु पिछले कुछ वर्षों के शोधों से पता चला है कि प्रतिभा पलायन से देश को कई प्रकार के लाभ भी मिले हैं। विदेश में कार्यरत लोग अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा अपने देश के विकास में भी खर्च करते हैं तथा विदेशों में प्राप्त अनुभव एवं शिक्षा को वह अपने वतन के लोगों से साझा करते हैं, जिससे देश के आर्थिक एवं शैक्षिक विकास में मदद मिलती है। बावजूद इसके प्रतिभा पलायन भारत जैसे देश के लिए शर्म की बात है। इसे तब ही रोका जा सकता है, जब यहां उच्च शिक्षित लोगों के लिए शिक्षा, रोजगार एवं शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। यदि हम चाहते हैं कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति करे, तो यह जरूरी है कि देश की प्रतिभाएं यहीं रहकर विकास में अपना संपूर्ण योगदान दें।
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