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आतंकवाद भाग 2 ()
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वैसे तो आज लगभग पूरा विश्व ही आतंकवाद की चपेट में है, किंतु भारत दुनियाभर में आतंकवाद से सर्वाधिक त्रस्त देशों में से एक है। इसका प्रमुख कारण भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान है। भारत और पाकिस्तान में आरंभ से ही जम्मू-कश्मीर राज्य विवाद का मुद्दा रहा है और दोनों ही देश इस पर अपना अधिकार करना चाहते हैं। पाकिस्तान कश्मीर को हथियाने के लिए अब तक तीन बड़े युद्ध कर चुका है और आए दिन सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करता रहता है, लेकिन अभी तक उसके हाथ असफलता ही लगी है, इसीलिए उसने भारत को आंतरिक रूप से नुकसान पहुँचाने के लिए आतंकवाद का सहारा लेना शुरु कर दिया। इसका नतीजा यह निकला है कि यदा-कदा भारत आतंकी हमलों का निशाना बनता रहता है। भारत में नक्सलवाद भी अब आतंकवाद का रूप ले चुका है। पहले नक्सलवाद का उद्देश्य अपने वास्तविक हक की लड़ाई थी, किंतु अब यह बहुत ही हिंसक विद्रोह के रूप में देश के लिए एक गंभीर समस्या एवं चुनौती बन चुकी है। प्रारंभ में यह विद्रोह पश्चिम बंगाल तक सीमित था, किंतु धीरे-धीरे यह ओडिशा, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ के क्षेत्रों में भी फैल गया। वैसे तो आतंकवाद के प्रमुख कारण राजनीतिक स्वार्थ, सत्ता लोलुपता एवं धार्मिक कट्टरता है, किंतु नक्सलवाद जैसी विद्रोही गतिविधियों के सामाजिक कारण भी है जिनमें बेरोजगारी एवं गरीबी प्रमुख हैं। विश्व के अधिकतर आतंकवादी संगठन युवाओं की गरीबी एवं बेरोजगारी का लाभ उठाकर ही उन्हें आतंकवाद के अंधे कुएँ में कूदने के लिए उकसाने में सफल रहते हैं। आतंकवाद के कुपरिणामस्वरूप अब तक दुनिया के कई राजनियिकों सहित मासूमों एवं निर्दोष लोगों की जानें जा चुकी हैं तथा लाखों लोग विकलांग एवं अनाथ बन चुके हैं। आतंकवाद के संदर्भ में सर्वाधिक बुरी बात यह है कि कोई नहीं जानता कि आतंकवादियों का अगला निशाना कौन होगा? इसलिए आतंकवाद ने आज लोगों के जीवन को असुरक्षित बना दिया है। यह मानव जाति के लिए कलंक बन चुका है। आतंकवाद की समस्या का सही समाधान यही हो सकता है कि जिन कारणों से इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाए। इसमें पिछड़े इलाके के युवक-युवतियों को रोजगार मुहैया कराने जैसे कदम अत्यधिक कारगर साबित होंगे। भारत में कुछ इलाकों में लोग अपने हक के लिए भी नक्सलवाद का सहारा ले रहे हैं, ऐसे इलाकों की पहचान कर उन्हें उनका अधिकार प्रदान करना अधिक उचित होगा। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे एवं पाकिस्तानी घुसपैठ को रोकते हुए इस राज्य पर अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत करनी होगी तथा आवश्यकता पड़ने पर पाकिस्तान से द्विपक्षीय वार्ता के अतिरिक्त उसके प्रति कठोर कदम उठाने के लिए भी तैयार रहना होगा। आतंकवाद आज वैश्विक समस्या का रूप ले चुका है।
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