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वरिष्ठ नागरिकों की समस्याएँ भाग 2 ()
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आज युवा पीढ़ी की मानसिकता यह हो गयी है कि वृद्ध व्यक्ति परिवार पर बोझ होते हैं। इसीलिए आजकल तो बच्चे अपने वृद्ध माता-पिता को घर से निकालकर उन्हें एक अपमानजनक जीवन जीने के लिए असहाय छोड़ देते हैं। यही कारण है कि आज भारत में भी ओल्ड एज होम की अवधारणा बलवती होती जा रही है। जो वृद्ध माता-पिता बिलकुल अकेले रह जाते हैं, उनके लिए ओल्ड एज होम जाने के अतिरिक्त कोई मार्ग शेष नहीं बचता और जो लोग इनका हिस्सा नहीं बनते तथा परिवार से दूर अकेले रहने का जोखिम उठाते हैं, उन्हें आपराधिक तत्त्वों का शिकार बनना पड़ता है। जो व्यक्ति कुछ समय पहले तक सबके लिए विशिष्ट था, महत्त्वपूर्ण था, अचानक ही उसे बोझ समझा जाने लगता है। उसके मान-सम्मान एवं भावनाओं का महत्त्व बहुत कम हो जाता है। भागदौड़ भरी जिन्दगी में युवा पीढ़ी उससे दूरी बना लेती है और वह अकेला रह जाता है। जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्वयं को अकेला पाता है, तो वह उसके जीवन का सबसे कठिन समय होता है। व्यक्ति का अस्तित्व तथा उसके उपयोगी होने की भावना से व्यक्ति में प्रेरणा शक्ति तथा आत्मविश्वास का संचार होता है, परंतु जब इस आत्मविश्वास जनित शक्ति का ह्रास हो जाता है तो व्यक्ति की स्थिति बड़ी दयनीय हो जाती है। यही परिस्थिति वृद्धावस्था का सबसे बड़ा अभिशाप है। वृद्धजनों को अकेला जानकर उनके साथ लूटपाट कर उनकी हत्या कर देने संबंधी घटनाओं में लगातार वृद्धि होती जा रही है। आज हममें से बहुत से लोग बुजुर्गों के महत्त्व से भली-भाँति परिचित ही नहीं हैं। सच तो यह है कि कम सक्रिय होने पर भी बुजुर्गों की उपयोगिता कम नहीं होती। एक अधिक सक्रिय बुजुर्ग जहाँ परिवार की देखभाल या उन्नति में सहयोग करता है, वहीं एक कम सक्रिय बुजुर्ग घर के सभी सदस्यों को भावनात्मक सुरक्षा देकर उन्हें एक कड़ी में पिरोए रखने में सहायक होता है। बड़े-बुजुर्गों से परिवार में अनुशासन बना रहता है, जो परिवार के सभी सदस्यों के हित में होता है। अक्सर प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए बुजुर्गों के अनुभव बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। आजकल के समय में जब पति-पत्नी दोनों को धनोपार्जन के लिए नौकरी पर जाना पड़ता है, तो घर में बुजुर्गों के होने से छोटे बच्चों का पालन-पोषण करने में सहायता मिलती है। घर में तनावपूर्ण स्थिति होने पर बुजुर्ग उसे आसानी से संभाल लेते हैं और सभी सदस्यों को भावनात्मक रूप से सुरक्षा प्रदान करते हैं। अतः वरिष्ठ नागरिकों का साथ मिलना हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उम्र भर कड़ा परिश्रम करने के बाद वृद्धावस्था व्यक्ति के आराम करने की अवस्था होती है। वह जीवन भर दूसरों की जरूरतों को पूरा करने और अपने कर्त्तव्यों को निभाने में ही लगा रहता है। वृद्धावस्था में उसे अपने ऊपर ध्यान देने का भरपूर समय मिलता है, परंतु आधुनिक दौर में स्थिति विपरीत है।
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